Tuesday, April 14, 2015

अब 'आप' नहीं 'मैं'

व्यंग्य: केजरीवाल का 'आप' से तौबा, नई पार्टी होगी 'मैं'
अरविंद केजरीवाल ने 'आप' से तौबा कर लिया है. केजरीवाल के समर्थक इसे बलिदान बता रहे हैं, जबकि उनके विरोधी कामयाबी मिल जाने के बाद दोस्तों, साथियों, हमराहियों और पुरानी चीजों से पल्ला झाड़ लेने की फितरत करार दे रहे हैं.
जैसे कि संकेत मिल रहे थे, केजरीवाल ने नई पार्टी बनाने का फैसले पर मुहर लगा दी है. केजरीवाल नहीं चाहते थे कि किसी भी कीमत पर आप टुकड़ों में बंटे. इसके लिए उन्होंने किंग सोलोमन के इंसाफ की मिसाल भी दी थी.

कुमार विश्वास ने कराया समझौता
अंबेडकर जयंती पर आप के बागियों की ओर से आयोजित 'स्वराज संवाद' की पूर्व संध्या पर इस समझौते को दोनों पक्षों की मौखिक मंजूरी मिल गई - और इसके साथ ही झगड़ा भी खत्म हो गया है. केजरीवाल के बेंगलुरु से इलाज कराकर लौटने के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी जिसमें कई बार उतार चढ़ाव आए. इसमें सबसे बड़ी भूमिका कुमार विश्वास ने निभाई. शुरू से ही कुमार दोनों पक्षों के बीच संवाद सेतु बने हुए थे - और इसे अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहे.

अब 'आप' नहीं 'मैं'
'मैं' - नई पार्टी का संक्षेप में यही नाम होगा. असल में, अंग्रेजी में पार्टी का शॉर्ट फार्म 'MAIN' बन रहा है जिसका विस्तृत स्वरूप है - 'मैं आम इंसान नहीं'. एक और नाम भी सुझाया गया था - 'मुझे अब इंकार नहीं', लेकिन केजरीवाल ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया. ये नाम अपने अंदर उस बड़े कैनवास को समेटे हुए था जो राजनीति में बदलावों और हालात के हिसाब से समझौतों के पक्षधर केजरीवाल के इंटरेस्ट से काफी हद तक मेल खाता है. मसलन - 'मुझे मुस्लिम पॉलिटिक्स', 'दलित या जातिगत राजनीति', 'वोटों की खरीद-फरोख्त', 'असहमत नेताओं को लात मारने' और 'राजनीति के तमाम हथकंडों से इंकार नहीं' जैसे जुमलों में फिट बैठता है.

नई पार्टी का प्रस्तावित स्वरूप
नाम के अलावा, नई पार्टी से जुड़ी काफी सारी चीजों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है. नई पार्टी से जुड़ी खास-खास बातें इस प्रकार हैं:
सिंबल - जैसा कि नई पार्टी का नाम है - मैं, इसलिए सब कुछ उसी हिसाब से होगा. दुनिया में पहली बार पार्टी का संस्थापक, कर्ताधर्ता का चेहरा ही पार्टी के सिंबल का हिस्सा बनेगा. नई पार्टी का सिंबल ग्रीन यूनिफॉर्म में वैक्युम क्लीनर के साथ एक व्यक्ति होगा. ये व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि खुद केजरीवाल होंगे. चूंकि पार्टी में ले दे कर वही एक चेहरा बन पाए हैं इसीलिए ये फैसला लिया गया है.

झंडा - नई पार्टी का झंडा काले और सफेद रंग का होगा. केजरीवाल का मानना है कि पॉलिटिक्स में सब कुछ ब्लैक एंड व्हाइट होना चाहिए और दूसरे रंगों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

स्लोगन - प्रस्तावित पार्टी का नारा होगा - 'मेरी कोई औकात नहीं'. इसे भी केजरीवाल के भाषणों से लिया गया है. अंदर की बात ये है कि इसके जरिए हर किसी को मैसेज देने की कोशिश की गई है कि नई व्यवस्था में किसी की कोई औकात नहीं होगी. इसका मकसद ये है कि भविष्य में किसी भी तरह की बगावत की गुंजाइश न हो.

टोपी की जगह मफलर - केजरीवाल ने टोपी को आप के हवाले करने के बाद मफलर को फिर से अपना लिया है . हर मौसम में मफलर लिया जा सके इसलिए अब 'समर मफलर' भी तैयार कराए जाएंगे. ये मफलर बनारस में इस्तेमाल होने वाले गमछे जैसे होंगे. लोक सभा चुनावों के लिए बनारस प्रवास के दौरान केजरीवाल ने गमछे की खासियत को ठीक से समझा. जब उन्होंने देखा कि लोग लाल गमछा पहन कर घाटों और गलियों में घूमते रहते हैं. बाद में जब दुकान या दफ्तर जाते हैं तो गमछा गले में नजर आता है - और जब धूप निकलती है तो लोग उसे सिर पर रख लेते हैं. नया अंगवस्त्रम् गमछे जैसा ही होगा लेकिन उसे मफलर कहा जाएगा. इस मफलर के कारण ही 'मैं' पार्टी का कार्यकर्ता अब 'मफलरमैन' के नाम से जाना जाएगा.

संविधान - 'मैं' का कोई लिखित संविधान नहीं होगा. असल में नई पार्टी के पास न तो इतना वक्त है और न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो संविधान लिख सके. ऐसे काम पहले योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण किया करते थे. इसलिए अब केजरीवाल के भाषणों से ही पार्टी का नया संविधान तैयार होगा. इसके लिए एक कमीशन बनाया जाएगा जो केजरीवाल के भाषणों से खास प्वाइंट छांट कर सुनिश्चित करेगा कि एक साथ जोड़ कर उसे संविधान की शक्ल दी जा सके. सोमनाथ भारती को इसका चेयरमैन बनाए जाने की चर्चा है. भारती की ही तरह हाशिए पर फिसलीं और काफी समय से बेरोजगार राखी बिडलान इस कमीशन की को-चेयरपर्सन हो सकती हैं.

'आप' का अपडेटेड वर्जन
अब आप की सेना के प्रमुख योगेंद्र यादव होंगे. उनके अलावा शांति भूषण, प्रशांत भूषण और शालिनी भूषण मूल स्वरूप वाली इस नई सेना के तीन मेन कमांडर होंगे. केजरीवाल ने आप के लिए गांधी टोपी के उस कस्टमाइज्ड फॉर्म को भी छोड़ दिया है जिस पर लिखा होता है - 'मैं हूं आम आदमी'. ये टोपी आप की संपत्ति बनी रहेगी. आप का संविधान और आंतरिक लोकपाल सहित सारे संवैधानिक पदों पर योगेंद्र यादव का ही कब्जा बना रहेगा. आप के चुनाव चिह्न 'झाडू' पर भी केजरीवाल ने दावेदारी छोड़ ही दी है - क्योंकि अपने लिए उन्होंने नया सिंबल खोज लिया है.

अन्ना, शाजिया की नई पारी
रामलीला आंदोलन में केजरीवाल के गुरु अन्ना हजारे के भी आप से जुड़ने की संभावना जताई जा रही है. अन्ना की राय में भले ही चुनाव आयोग में आप की राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता बनी रहे लेकिन हकीकत में अब वो सियासी फोरम तो रह नहीं जाएगा. अन्ना का मानना है कि जब उसमें केजरीवाल ही नहीं रहे तो वहां राजनीतिक कहां होगी - वो तो फिर से आंदोलनकारी संगठन हो जाएगा. इस बीच आप की संस्थापकों में से एक शाजिया ईल्मी की वापसी की भी चर्चा है - क्योंकि बीजेपी में भी फिलहाल उनकी कोई पूछ नहीं है. अगर वो लौटती हैं तो आप की मुख्य प्रवक्ता बनाई जा सकती है.

समझौते के अनुसार दिल्ली के सभी 67 विधायकों पर नई पार्टी की दावेदारी रहेगी और सारे कार्यकर्ता ओरिजिनल 'आप' की प्रॉपर्टी होंगे. हां, फिर से पाला बदलने वालों के लिए एक ज्वाइंट कमेटी बनाई गई है जिसमें दोनों पक्षों के लोग शामिल होंगे - और ऐसे लोगों के बारे में कमेटी का ही फैसला अंतिम माना जाएगा. राजनीतिक के जानकार एक्सपेरिमेंटल पॉलिटिक्स के नये दौर में केजरीवाल के इस कदम को एक और मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं.

# मृगाङ्क शेखर [Cut/Paste from 'http://aajtak.intoday.in' where this article was originally published.]

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